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मंगल दोष कैलकुलेटर

जानिए क्या आप मांगलिक हैं (मंगल दोष / कुज दोष) — आपके लग्न, चंद्र और शुक्र से जाँच — आपके दोष की तीव्रता, आपकी कुंडली पर लागू होने वाले भंग (रद्दीकरण) और उपायों सहित।

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उत्तर भारतीय परंपरा दूसरे भाव को नहीं गिनती; दक्षिण भारतीय पहले भाव को छोड़ती है। मानक दोनों को जाँचता है।

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मंगल दोष (मांगलिक) क्या है?

मंगल दोष — जिसे सामान्यतः मांगलिक होना कहते हैं, और दक्षिण में कुज दोष या सेव्वई दोष के नाम से जाना जाता है — हिंदू विवाह से पूर्व सबसे अधिक जाँचे जाने वाले कारकों में से एक है। यह तब बनता है जब अग्नि व आक्रामकता का ग्रह मंगल जन्म कुंडली के विवाह-संवेदनशील भावों — पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें — में बैठता है। मंगल ऊर्जा, संघर्ष व आवेग रखता है, अतः इन भावों में इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन में मतभेद, विलंब या कठिनाई लाती मानी जाती है।

तीन बिंदुओं से जाँच: लग्न, चंद्र और शुक्र

उचित मांगलिक जाँच केवल लग्न को नहीं देखती। मंगल की जाँच तीन संदर्भ बिंदुओं से होती है — लग्न (आपका शरीर), चंद्र (आपका मन व भावनाएँ) और शुक्र (जीवनसाथी का नैसर्गिक कारक)। यदि इनमें से किसी से भी मंगल दोष भाव में है तो दोष उपस्थित है। आप तभी वास्तव में गैर-मांगलिक हैं जब तीनों में से कोई प्रभावित न हो।

दोष कितना प्रबल है?

तीव्रता इस पर आँकी जाती है कि तीनों में से कितनी कुंडलियाँ प्रभावित हैं और मंगल किस भाव में है। बिना राहत के तीनों बिंदुओं से प्रभाव उच्च या पूर्ण मांगलिक है; एक बिंदु से या शुभ ग्रह से मृदु होने पर अल्प या अंशिक मांगलिकसातवाँ भाव (विवाह का भाव) और आठवाँ भाव (जीवनसाथी की आयु) सबसे कठिन स्थितियाँ मानी जाती हैं।

भंग (रद्दीकरण) और उपाय

महत्वपूर्ण रूप से, मंगल दोष प्रायः रद्द या मृदु हो जाता है। सर्वाधिक मान्य नियम यह है कि जब दोनों साथी मांगलिक हों, तो दोष परस्पर निष्प्रभावी हो जाते हैं। अन्य भंगों में मंगल का अपनी राशि (मेष या वृश्चिक) में या उच्च (मकर) में होना, गुरु या चंद्र का मंगल से युति या दृष्टि, और कुछ राशि-भाव संयोग शामिल हैं। परंपरागत उपायों में हनुमान जी की पूजा, मंगल मंत्र, मंगलवार व्रत और — प्रबल दोष के लिए — विवाह से पूर्व कुंभ विवाह सम्मिलित हैं। परंपराएँ भिन्न हैं, अतः इसे संकेतात्मक मानें और पूर्ण विश्लेषण हेतु आराधना ऐप पर गुरुजी से परामर्श करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल दोष (मांगलिक) क्या है?+

मंगल दोष — जिसे मांगलिक, कुज या सेव्वई दोष भी कहते हैं — वैदिक ज्योतिष की वह स्थिति है जिसमें मंगल जन्म कुंडली के कुछ भावों (पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें) में लग्न, चंद्र और शुक्र से बैठता है। मंगल अग्नि व आक्रामकता का ग्रह है, अतः विवाह-संवेदनशील भावों में इसकी स्थिति वैवाहिक जीवन में मतभेद या विलंब लाती मानी जाती है।

मांगलिक दोष की गणना कैसे होती है?+

यह कैलकुलेटर आपकी जन्म तिथि, समय व स्थान से आपका लग्न, चंद्र राशि और शुक्र निकालता है, फिर जाँचता है कि इन तीनों से मंगल किसी दोष भाव (1, 2, 4, 7, 8 या 12) में है या नहीं। यदि किसी से भी मंगल दोष देता है तो दोष उपस्थित है; इसकी तीव्रता इस पर निर्भर करती है कि तीनों में से कितने प्रभावित हैं और कौन-से भाव शामिल हैं (सातवाँ और आठवाँ सबसे प्रबल)।

पूर्ण और अंशिक मांगलिक में क्या अंतर है?+

जब मंगल तीनों संदर्भ बिंदुओं से बिना किसी राहत के दोष भावों को प्रभावित करता है तो आप उच्च या पूर्ण मांगलिक हैं, और जब केवल एक से दिखता है या शुभ राशि/दृष्टि से मृदु होता है तो अल्प या अंशिक मांगलिक। अंशिक मांगलिक हल्का होता है और परंपरा अनुसार प्रायः 28 वर्ष की आयु के बाद घटता माना जाता है।

क्या मंगल दोष रद्द हो सकता है?+

हाँ। प्रसिद्ध भंग योगों में शामिल हैं: दोनों साथी मांगलिक होना, मंगल का अपनी राशि (मेष/वृश्चिक) में या उच्च (मकर) में होना, गुरु या चंद्र का मंगल से युति या दृष्टि, कुछ राशि-भाव संयोग, और शनि का प्रभाव। ये दोष को पूर्णतः हटाते नहीं, केवल घटाते हैं, अतः पूर्ण कुंडली विश्लेषण सर्वोत्तम है।

क्या उत्तर व दक्षिण भारतीय विधि अलग है?+

हाँ। उत्तर भारतीय ज्योतिषी मंगल को दूसरे भाव में नहीं गिनते, जबकि दक्षिण भारतीय दूसरे भाव को गिनते हैं (और कुछ पहले को छोड़ते हैं)। यह कैलकुलेटर आपको उत्तर, दक्षिण या दोनों को जाँचने वाली मानक विधि चुनने देता है, ताकि आप अपने परिवार की परंपरा से मिलान कर सकें।